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बुधवार, 13 मई 2015


पूज्य डॉ० जय शंकर त्रिपाठी जी का मौलिक निबंधों का संग्रह "आंठवा अमृत ",जो तमाम खूबियों की विविधता समेटे हुए है | उत्तर प्रदेश राज्य पुरस्कार से सम्मानित पंडित जी की सभी रचनाएं अपनी मौलिकता के लिए प्रसिद्द हैं | इस निबंध संग्रह में 'मूर्तिमान कुमार-सम्भव',साहित्य में में अमृत और विष ',रघुवंश का रचमान सौंदर्य', 'चार कल्पित आख्यान 'और गाँव अनजाना ' जैसे कई उत्कृष्ट निबंधों की श्रृंखला है जो साहित्य प्रेमियों को सहज ही प्रभावित करती है | कुल २७ निबंधों का यह संग्रह साहित्य में सच ही आंठवा अमृत है | प्रकाशक -विभा प्रकाशन ,५० चाहचंद इलाहाबाद से प्रकाशित |
 

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